स्वामी चिदानंद ने प्रकृति और पर्यावरण से संबंध बनाने का दिया संदेश
मंत्री व प्रतिष्ठित लोगों ने गंगा आरती में किया सहभाग
ऋषिकेश। पर्यटन, पर्यावरण, वन, सांस्कृतिक गतिविधियाँ एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री गुजरात मुलुभाई बेरा अपने परिवार के साथ परमार्थ निकेतन पहुंचे। वह परमार्थ निकेतन के दिव्य व आध्यात्मिक वातावरण को देखकर गद्गद हुए।
मंत्री मुलुभाई बेरा ने स्वामी चिदानन्द सरस्वती और साध्वी भगवती सरस्वती के पावन सान्निध्य में मां गंगा की आरती में सहभाग किया। इस दौरान मुलुभाई बेरा ने कहा कि स्वामी चिदानंद के नेतृत्व व मार्गदर्शन में परमार्थ निकेतन, पर्यावरण संरक्षण और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने में महत्वपूर्ण योगदान प्रदान कर रहा है। इस अवसर पर हिट्टॉर्फ़ जिमनैजियम स्कूल, जर्मनी के हेडमास्टर डॉ. माइकल जेंट्सच और एक्सचेंज प्रोग्राम समन्वयक क्रिस्टोफर कम्मन ने मां गंगा आरती में सहभाग कर आध्यात्मिक अनुभव का लाभ उठाया और परमार्थ निकेतन की दिव्यता और आत्मीयता का अनुभव किया।
वहीं, धर्मानन्दन डायमंड ग्रुप के 1000 से अधिक पदाधिकारियों ने गंगा आरती में सहभाग किया। प्रतिवर्ष दीपावली के अवसर पर धर्मानन्दन डायमंड ग्रुप अपने कर्मचारियों को उन्हें आध्यात्मिक जागरण के लिये मां गंगा के तट परमार्थ निकेतन में लेकर आते हैं और नूतन ऊर्जा लिये शांतिपूर्ण और आध्यात्मिक आभा के साथ वापस लौटते हैं। इसके आलावा फिजी के डिप्टी हाई कमिश्नर निलेश कुमार भारतीय संस्कार व संस्कृति को आत्मसात करने के लिये परमार्थ निकेतन प्रतिवर्ष आते हैं। उन्होंने कहा कि यह उनके लिए एक अनमोल अनुभव है। स्वामी चिदानंद के आशीर्वाद से वे अभिभूत होकर नई ऊर्जा के साथ यहां से लौटते हैं।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि व्यापार को आगे बढ़ाने के लिये और सफल बनाने के लिए पीआर (पब्लिक रिलेशंस) की आवश्यकता होती है, जबकि एक परिवार को आगे बढ़ाने के लिए प्यार और संस्कारों की अहम भूमिका होती है। आज के प्रतिस्पर्धी युग में, किसी भी व्यवसाय या उद्योग को बढ़ाने के लिए प्रभावी पीआर रणनीति अपनाना जरूरी है। पीआर के माध्यम से व्यवसायिक प्रतिष्ठान अपनी छवि को न केवल बाजार में स्थापित कर सकते हैं, बल्कि ग्राहकों के साथ एक मजबूत और विश्वासपूर्ण संबंध भी बना सकते हैं। कैसे बड़े-बड़े ब्रांड और कंपनियां पीआर का सही उपयोग कर अपनी उपस्थिति को मजबूती से स्थापित करती हैं और अपने उपभोक्ताओं के साथ विश्वास का सेतु बनाती हैं।
वैसे ही परिवार को आगे बढ़ाने के लिए प्यार और संस्कारों की आवश्यकता होती है। परिवार एक ऐसा संस्थान है जहां भावनात्मक और नैतिक समर्थन जरूरी है। एक खुशहाल परिवार वही होता है जहां प्यार और विश्वास का वातावरण हो। ये वे मूल्य हैं जिन्हें पीढ़ी दर पीढ़ी हस्तांतरित करना जरूरी है। एक सफल और संतुलित जीवन के लिए आवश्यक है कि हम अपने परिवार में प्यार, सम्मान और विश्वास को बनाए रखें और इन्हें आगे बढ़ाने के लिए प्रयासरत रहें। इस मौके पर स्वामी चिदानंद ने अतिथियों को रूद्राक्ष का पौधा भेंट करते हुये प्रकृति, पर्यावरण और धरती माता के साथ सामंजस्यपूर्ण संबंध स्थापित करने का संदेश दिया।




