उत्तराखंडलेटेस्ट खबरें

भारत के महान विभूतियों की जयंती पर परमार्थ में यज्ञ और भंडारे का आयोजन

ऋषिकेश। भारत रत्न स्वर्गीय अटल बिहारी बाजपेयी की 100वीं जयंती और बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के संस्थापक भारत रत्न महामना पंडित मदनमोहन मालवीय की 163वीं जयंती के अवसर पर परमार्थ निकेतन में विशेष यज्ञ का आयोजन किया गया। इसमें परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने श्रद्धा और सम्मान के साथ इन दोनों महान विभूतियों को श्रद्धांजलि अर्पित की।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने अटल बिहारी बाजपेयी को याद करते हुए कहा कि अटल बाजपेयी हमेशा अटल थे, सबल थे और निर्बलों के बल थे। वे जब भी किसी से मिलते थे, उनकी विनम्रता और वाणी में ऐसी शक्ति होती थी कि वह हर व्यक्ति के दिल में अपनी विशेष जगह बना लेते थे। उनका व्यक्तित्व सशक्त था और उनकी हर बात से समाज के हर वर्ग को एक दिशा मिलती थी।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि आज के दिन की गंगा आरती को हम दोनों महान व्यक्तित्वों को समर्पित करते हैं। उनका जीवन हमें यह सिखाता है कि हम सभी को अपने कर्तव्यों और जिम्मेदारियों के प्रति निष्ठा और संकल्प से काम करना चाहिए। अटल बिहारी ने हमेशा देश की सेवा की और समाज को प्रगति की दिशा दी।

इस अवसर पर परमार्थ निकेतन में एक विशाल भंडारे का आयोजन हुआ। जिसमें राहगीरों, निराश्रितों, पूज्य संतों और साधुओं को भोजन कराया गया। यह भंडारा अटल बाजपेयी की जयंती और पंडित मदनमोहन मालवीय की जयंती की श्रद्धांजलि के रूप में आयोजित किया गया। इसमें स्वामी चिदानन्द सरस्वती और शिवोऽहम् चैरिटेबल ट्रष्ट गोर्वधन, मथुरा के हरिशंकर शर्मा ने अपने हाथों से सभी को भोजन परेासा।

इस अवसर पर स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि आज के दिन को तुलसी पूजन दिवस के रूप में भी मनाया जाता और कुछ लोग क्रिसमस के रूप में भी मनाते है। कहा कि आज का दिन पेड़ काटने का नहीं, बल्कि पेड़ लगाने का है। स्वामी चिदानंद ने मध्यप्रदेश सरकार की पहल का स्वागत करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश सरकार ने वृक्षों को भी पेंशन देने की योजना बनाई है, जो एक बहुत ही सकारात्मक कदम है। वृक्ष हमें प्राणवायु प्रदान करते हैं और यह हमारे जीवन के लिए अनिवार्य हैं। उन्होंने कहा कि आज के दिन हम केवल तुलसी का पौधे के साथ हर प्रकार के वृक्षों का रोपण करें, ताकि हमारी आने वाली पीढ़ी को ताजगी और शुद्ध वायु मिल सके।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने भारतीय संस्कृति की महत्वपूर्ण बातें साझा करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति हमेशा से जीवन को देने की ओर अग्रसर रही है। हमने कभी जीवन को छीनने का प्रयास नहीं किया, हम हमेशा से जीवन देने वाले रहे हैं, चाहे वह वृक्ष हों, वृद्ध हों या फिर हम स्वयं। यह हमारी संस्कृति की पहचान है, और हमें इसे संरक्षित करना होगा। कहा कि भारतीय संस्कृति का एक अहम अंग है प्रकृति की पूजा और संरक्षण। वृक्षों, नदियों और अन्य प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण भारतीय जीवन का मूल आधार रहा है, और हमें इसे आगे बढ़ाना चाहिये।

Related Articles

Back to top button