परमार्थ में निःशुल्क दिव्यांगता मुक्त शिविर का समापन
दिव्यांगों को बांटे कृत्रिम व सहायक अंग
ऋषिकेश। परमार्थ निकेतन में आयोजित निःशुल्क दिव्यांगता मुक्त शिविर के समापन पर दिव्यांगों को कृत्रिम व सहायक अंग वितरित किए गए। साथ ही गंगा तट पर गंगा आरती के दौरान परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने दिव्यांग जनों को रूद्राक्ष का माला पहनाकर अभिनंदन किया।
शिविर में महामंडलेश्वर स्वामी असंगानन्द सरस्वती एवं स्वामी चिदानन्द सरस्वती का मार्गदर्शन व आशीर्वाद पाकर सभी दिव्यांग जन प्रसन्नचित हुए। इस दौरान दिव्यांग जनों ने कहा कि अक्सर लोग हमें समाज के अन्य लोगों से अलग दृष्टि से देखते हैं, लेकिन जो आज परमार्थ निकेतन गंगा तट पर सम्मान प्राप्त हुआ है, उसे हम शब्दों में व्यक्त नही कर सकते। उन्होंने कहा कि वास्तव में यही समाज सेवा और मानवता की सेवा हैं। इस शिविर का मुख्य उद्देश्य दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाना और उन्हें समाज की मुख्यधारा में लाना भी है।
बता दें कि शिविर में दिव्यांगजनों को कृत्रिम अंग और अन्य सहायक उपकरण वितरित किए गए। इसके साथ विशेषज्ञों ने दिव्यांगजनों की जांच कर आवश्यक चिकित्सा सहायता प्रदान की एवं मानसिक और भावनात्मक समर्थन भी दिया। स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि हमारा उद्देश्य दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाना और उन्हें समाज की मुख्यधारा में शामिल करना है। उन्होंने बताया कि जो टेक्निशियन कोलकाता के महावीर सेवा सदन से आए हैं, उनमें से अधिकांश दिव्यांग है। यहां उन्हें कृत्रिम अंग प्रदान कर हौसला अफजाई की गई। इसका परिणाम आज वही दिव्यांग दूसरों के लिए कृत्रिम अंग बना रहे है। यह अपने आप में एक मिसाल है और सच्ची सेवा के साथ दूसरों के लिये प्रेरणा भी है कि अपने दर्द से उबरकर कैसे समाज सेवा के प्रति और अधिक समर्पित हो सकते हैं। वहीं, शिविर में आए लाभार्थियों ने परमार्थ निकेतन, महावीर सेवा सदन और सभी सहयोगियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस शिविर ने उनके जीवन में एक नई रोशनी लाई है और उन्हें आत्मनिर्भर बनने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाने में मदद की है। शिविर में भाग लेने वाले कई लोगों ने अपने अनुभव साझा किए और बताया कि कैसे इस शिविर ने उनकी जिंदगी बदल दी है।
उत्तराखंड के रजिस्टार लॉ ब्रजेन्द्र मणि त्रिपाठी ने कहा कि परमार्थ निकेतन का यह प्रयास समाज सेवा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस शिविर ने यह साबित कर दिया है कि जब समाज के सभी वर्ग एक साथ मिलकर काम करते हैं, तो कोई भी चुनौती असंभव नहीं होती है। इस शिविर ने यह भी दिखाया है कि समाज में दिव्यांग व्यक्तियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए हमें केवल शारीरिक सहायता ही नहीं, बल्कि मानसिक और भावनात्मक समर्थन भी प्रदान करना चाहिए। शिविर के समापन पर सभी ने एक साथ मिलकर संकल्प लिया कि वह समाज में दिव्यांगता के प्रति जागरूकता बढ़ाने और दिव्यांग व्यक्तियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए निरंतर प्रयास करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि इस शिविर ने समाज में एक नई ऊर्जा और उत्साह का संचार किया है और यह साबित कर दिया है कि समाज सेवा के क्षेत्र में परमार्थ निकेतन का योगदान अतुलनीय है। इस मौके पर डा अणिमा सिन्हा, पल्लवी, राजेश, मुकेश, राम, साशमोल और अन्य सेवा टीम मौजूद रही।




