दिव्यांगता मुक्त भारत बनाना संपूर्ण समाज की जिम्मेदारी : स्वामी चिदानंद
दिव्यांगता मुक्त भारत का उद्देश्य विशेष बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ना
ऋषिकेश। विश्व दिव्यांग दिवस पर परमार्थ विजय पब्लिक स्कूल उत्तरकाशी के विशेष बच्चों ने जागरूकता रैली निकालकर महत्वपूर्ण संदेश दिया। रैली के माध्यम से बच्चों ने समाज में दिव्यंका के प्रति जागरूकता बढ़ाई। साथ ही उन्होंने दिशा और समर्थन मिलने पर विशेष बदलाव का संदेश भी दिया।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि दिव्यांगता मुक्त भारत का सपना केवल दिव्यांगजनों व उनके परिवार वालों का नहीं बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है। समाज के हर वर्ग को इस अभियान में अपना योगदान देना होगा चाहे वह आर्थिक सहयोग हो, जागरूकता फैलाना हो, या दिव्यांगजनों के लिए रोजगार के अवसर सृजित करना हो। क्योंकि यही एक माध्यम है जब हम समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं।
उन्होंने कहा कि दिव्यांगता मुक्त भारत अभियान न केवल दिव्यांगजनों के जीवन को बेहतर बना रहा है, बल्कि समाज में उनके प्रति संवेदनशीलता और सहानुभूति बढ़ाने का कार्य भी कर रहा है। इस अभियान के अन्तर्गत न केवल कृत्रिम उपकरणों का वितरण किया जा रहा है, बल्कि दिव्यांगजनों के जीवन में आत्मनिर्भरता और सम्मान का पुनर्स्थापन भी किया जा रहा है। इस पहल से पहाड़ी क्षेत्रों में रह रहे दिव्यांगजनों को उनकी जरूरतों के मुताबिक सहायक उपकरण आसानी से उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
कहा कि कृत्रिम अंग और सहायक उपकरण केवल शारीरिक सहारा ही नहीं प्रदान करते, बल्कि दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी बनने का अवसर भी देते हैं। इस अभियान के माध्यम से, दिव्यांगजन न केवल सामान्य जीवन जीने की ओर कदम बढ़ा रहे हैं, बल्कि अपने परिवार और समाज के लिए भी प्रेरणा बन रहे हैं।
स्वामी चिदानंद ने कहा कि दिव्यांगता मुक्त भारत अभियान का विधिवत शुभारंभ वर्ष 2012 में परमार्थ निकेतन और महावीर सेवा सदन ने संयुक्त रूप से किया था। इस अभियान का उद्देश्य दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाना और उन्हें समाज की मुख्यधारा में शामिल करना है। इसके अंतर्गत, कृत्रिम अंग, कैलिपर्स, कृत्रिम हाथ और पैर, बैसाखी, वॉकर, संशोधित जूते आदि सहायक उपकरण निःशुल्क वितरित किए जाते हैं। उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर, लेह-लद्दाख जैसे दूरदराज और पहाड़ी क्षेत्रों में दिव्यांगजनों तक कृत्रिम अंगों और सहायक उपकरणों की सुविधाएं पहुंचाने के लिए विशेष वाहन फैक्ट्री का निर्माण एक प्रेरणादायक पहल है, क्योंकि दुर्गम पहाड़ी इलाकों में दिव्यांगजनों तक सहायक उपकरण पहुंचाना हमेशा से एक चुनौती रही है। इसे ध्यान में रखते हुए परमार्थ निकेतन और महावीर सेवा सदन ने विशेष वाहन फैक्ट्री का निर्माण किया है। यह वाहन न केवल उपकरण पहुंचाने में सहायक होंगे, बल्कि मौके पर ही उपकरणों को तैयार और फिट करने की सुविधा भी प्रदान करते हैं।
उन्होंने कहा कि महावीर सेवा सदन विगत 47 वर्षों से दिव्यांगजनों को निःशुल्क सहायक उपकरण उपलब्ध कराने का कार्य कर रहा है। अब तक लाखों दिव्यांगजन इस सेवा से लाभान्वित हो चुके हैं। इस वर्ष परमार्थ विजय पब्लिक स्कूल के दिव्यांग बच्चों द्वारा निकाली गई जागरूकता रैली ने दिव्यांगजनों के प्रति समाज में एक नई सोच पैदा की है। बच्चों ने अपनी रैली के दौरान नारे और संदेशों के माध्यम से बताया कि दिव्यांगता कोई अभिशाप नहीं, बल्कि एक ऐसी स्थिति है जिसे समाज के सहयोग से बेहतर बनाया जा सकता है।
स्वामी चिदानंद ने सभी का आह्वान करते हुये कहा कि आइए, हम सब मिलकर इस मिशन का हिस्सा बनें और दिव्यांगजनों को एक सम्मानजनक और आत्मनिर्भर जीवन प्रदान करने में सहयोग करें। परमार्थ निकेतन द्वारा शुरू किये दिव्यांगता मुक्त भारत अभियान में आधुनिक वैज्ञानिक, सरसंघचालक, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ, राष्ट्रऋषि डा मोहन भागवत, भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, 14 वें राष्ट्रपति भारत श्रीरामनाथ कोंविद, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, मंत्री धनसिंह रावत और अनेक विभूतियों का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। उन्होंने इस पहल की भूरि-भूरि प्रशंसा भी की।




