उत्तराखंड

बापू ग्राम की चौखट पर सियासी टकराव: हरीश रावत ने सरकार को घेरा, घर-जमीन बचाने के आंदोलन में उतरे

ऋषिकेश। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद घर और भूमि पर मंडाए संकट को लेकर बापू ग्राम, शिवाजी नगर, मीरा नगर एवं मालवीय नगर के लोगों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। बापू ग्राम बचाओ संघर्ष समिति के बैनर तले चल रहे धरने को शनिवार को उस समय और बल मिला, जब उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत धरनास्थल पर पहुंचे और आंदोलनरत लोगों से संवाद किया।

धरनारत नागरिकों को संबोधित करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने मौजूदा सरकार और उसके नुमाइंदों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि वर्षों से बसे लोगों के घर और जमीन को असुरक्षित करना सरकार की संवेदनहीनता को दर्शाता है। रावत ने कहा कि बापू ग्राम सहित आसपास के क्षेत्रों के लोग किसी अवैध कब्जे के नहीं, बल्कि अपने हक और अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं।

हरीश रावत ने कहा कि राज्य सरकार को चाहिए था कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद प्रभावित परिवारों के पुनर्वास, वैकल्पिक व्यवस्था और स्थायी समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाती, लेकिन सरकार ने लोगों को अनिश्चितता और भय के हवाले कर दिया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कांग्रेस पार्टी इस संघर्ष में जनता के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है और जरूरत पड़ी तो इस आंदोलन को प्रदेश स्तर तक ले जाया जाएगा।

धरने पर बैठे लोगों ने पूर्व मुख्यमंत्री के समक्ष अपनी पीड़ा रखते हुए कहा कि दशकों से बसे उनके घर, आजीविका और भविष्य पर संकट खड़ा हो गया है। आंदोलनकारियों ने सरकार से मांग की कि प्रभावित क्षेत्रों को राहत दी जाए और किसी भी प्रकार की कार्रवाई से पहले मानवीय समाधान सुनिश्चित किया जाए।
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने आंदोलनकारियों को आश्वस्त किया कि वे इस मुद्दे को हर संभव मंच पर उठाएंगे और जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रहेगा। धरने में बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक, महिलाएं और युवा मौजूद रहे, जिनमें सरकार के प्रति गहरा रोष देखने को मिला।

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