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स्वामी चिदानंद ने महाकुंभ 2025 को भव्यता प्रदान करने पर किया मंथन

तिरुपति मंदिर प्रसादम् मामला घिनौना कृत्य : स्वामी चिदानंद

ऋषिकेश। परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने इन्डिया थिंक काउंसिल द्वारा आयोजित महाकुम्भ 2025 -चिंतन मंथन ऑनलाइन प्लेटफाॅर्म के माध्यम से जुड़कर महाकुम्भ 2025 को दिव्यता व भव्यता से युक्त बनाने हेतु चिंतन-मंथन किया।

इस अवसर पर स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने तिरुपति मंदिर प्रसादम् मामले पर विचार साझा करते हुये कहा कि यह घिनौना कृत्य सनातन संस्कृति को दूषित करने की बड़ी साजिश है। विधर्मियों ने पहले तो मन्दिरों पर कंट्रोल किया फिर धीरे-धीरे मन्दिरों में प्रवेश किया और अब पूरी संस्कृति व शुद्धि का विनाश किया जा रहा है। हमारी आस्था से खिलवाड़ किया जा रहा है। स्वामी चिदानंद ने कहा कि मन्दिर अर्थात् सबसे शुद्धतम् स्थान, प्रसादम् अर्थात सबसे शुद्धतम् वस्तु उसी के साथ खिलवाड़ यह महापाप है और जघन्य अपराध है। उन्होंने कहा कि धार्मिक विश्वास, धार्मिक भावनाओं का अनादर कभी भी बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। सनातन संस्कृति के साथ खिलवाड़ वह भी अपने फायदे के लिये जघन्यता की श्रेणी में आता है। थोड़े से फायदे के लिये, अपने मूल, मूल्य, परम्परा, आस्था, विश्वास, करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाओं और आस्था के साथ खेलना कहा का न्याय है। जो हमारे धाम शुद्धता, पवित्रता और शुचिता के केन्द्र है वहां पर किसी भी प्रकार की अशुद्धता के प्रवेश के विषय में सोचना भी एक तरह का अपराध है इसलिये दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिये। प्रसादम् में अशुद्धता, प्रसादम में घोटाला, प्रसादम् से खिलवाड़ हमारी पूरी सनातन संस्कृति से खिलवाड़ है। अब समय आ गया है कि मन्दिरों की कमेटी में पूज्य संतों, मदिरों व मठों के सनातन धर्म को जीने वाले पदाधिकारियों और चितंकों को स्थान मिले ताकि सब की दृष्टि हो, क्योंकि बात केवल एक मन्दिर की नहीं सनातन संस्कृति की है, बात प्रभु की है और बात नियंता की है।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि कुम्भ विश्व का सबसे बड़ा मेला है, जो सदियों से चला आ रहा है। जिसने पूरे विश्व को विश्व बन्धुत्व का संदेश दिया है। कुम्भ हमें अपनी जड़ो से जुड़ने, भारतीय संस्कृति को पहचानने, अपने गौरव को जानने तथा इस गौरवमय संस्कृति को आत्मसात करने का अवसर प्रदान करना है। कहा कि वर्ष 2019 प्रयागराज में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कुशल मार्गदर्शन और उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में आयोजित कुम्भ अद्भुत था, जिसने वैश्विक स्तर पर एक मिसाल कायम की। आगामी महाकुम्भ 2025 भी अद्भुत व अलौकिक होने वाला है और यह एक बड़ा अवसर है, संगम के तट से संगम का संदेश देने का ताकि यहां से पूरे विश्व को वसुधैव कुटुम्बकम् का संदेश जाये।

स्वामी चिदानंद ने कहा कि पीएम मोदी के जन्मदिवस से महात्मा गांधी के जन्मदिवस तक पूरा देश स्वच्छता पखवाड़ा मना रहा हैं और उत्तरप्रदेश सरकार के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और पूरा शासन-प्रशासन क्लीन, ग्रीन और सरीन कुम्भ की तैयारियां कर रहे हैं जो अद्भुत कार्य है। उन्होंने कहा कि कुम्भ के दौरान स्वच्छता को बनाये रखने के लिये सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग बिल्कुल न हो क्योंकि यह धरती, हमारी नदियों और हमारे स्वास्थ्य के लिये हानिकारक हैं इसलिये कपड़े के झोले का प्रयोग हो अब समय आ गया हक झोले में लायें नहीं बल्कि लेकर जायें क्योंकि अपना कचरा अपनी जिम्मेदारी है। कहा कि झोले बनाने में खर्च तो होगा परन्तु प्लास्टिक कचरे से जो गंदगी व प्रदूषण होगा उसे तो रोका जा सकता है हमें यह भी याद रखना होगा कि गंदगी व बंदगी साथ-साथ नहीं हो सकती इसलिये शाही स्नान तो हो पर अब संगम स्नान भी हो। महाकुम्भ के दौरान आध्यात्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन, भारतीय संस्कृति और संस्कारों का आयोजन तो हो परन्तु साथ ही जल, जंगल, जमीन और सब प्राणीमात्र के जीवन को स्वच्छ व स्वस्थ कैसे रखना है इस पर भी चितंन, मंथन व एक्शन हो। इन विषयों पर स्वामी जी ने कई प्रेरणादायक विचार साझा किये।

स्वामी चिदानंद ने कहा कि कुम्भ के दौरान संगम स्नान का बड़ा महत्व है इसलिये संगम में स्नान करने से पूर्व हमें संगम को स्नान करायें अर्थात आसपास किसी भी प्रकार का कचरा हो उसे अपने झोले में डाले-अपना कचरा भी मेले में नहीं झोले में हो। क्योंकि संगम है, हमारे देश का समाधान और संगम ही है इस देश का संविधान। अतः संगम को समझें और संगम को जियें। जब हमारी नीति और नियति साफ होती है तो नियति हमेशा सतत विकास और सुरक्षित विकास की ओर ले जाती है। भारत अपने लिये नहीं बल्कि भारत तो पूरे विश्व के लिये जीता है। भारत कोई धरती का टुकड़ा नहीं बल्कि भारत तो जीता जागता राष्ट्र है इसलिये सर्वसमावेशी संस्कृति ही है समाधान। संगम के तट से संगम का संदेश, महाकुम्भ का संदेश स्वस्थ शरीर, समृद्ध भारत का होना चाहिए।

परमार्थ निकेतन में वाइल्ड लाइफ इन्टिट्यूट के अधिकारियों के साथ नदियों के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली पांच से अधिक राज्यों की नदी व नदी संस्कृति की रक्षा करने वाली दादियों ने परमार्थ निकेतन गंगा आरती में सहभाग कर पूज्य स्वामी से भेंट का आशीर्वाद लिया। उन्होंने कहा कि आप सभी के पास प्राचीन व पौराणिक ज्ञान है उसे आज की युवा पीढ़ीयों के साथ साझा करें ताकि हमारे प्राकृतिक संसाधनों के साथ नदियाँ व नदी संस्कृति भी बची रहे।

इस महाकुम्भ-2025 की थीम इस वर्ष “भव्य-दिव्य और नव्य” होगा। महाकुम्भ 2025 प्रयागराज की प्रमुख स्नान तिथियाँ-मकर संक्रांति 14 जनवरी, पौष पूर्णिमा 13 जनवरी, मौनी अमावस्या 29 जनवरी, बसंत पंचमी 3 फरवरी, माघी पूर्णिमा 12 फरवरी, महाशिवरात्रि 26 फरवरी होगी। इन तिथियों पर विशेष ध्यान रखने की जरूरत कि सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग न हो ताकि हमारी नदियाँ स्वच्छ व प्रदूषण मुक्त बनी रहे।

इस अवसर पर जीएस नवीन कुमार आईएएस सचिव सिंचाई उत्तर प्रदेश सरकार, प्रो. संजय पासवान पूर्व केंद्रीय मंत्री, प्रो श्रीनिवास वोराखेड़ी कुलपति केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, प्रो. जीएसआर कृष्णमूर्ति कुलपति राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, डॉ. नीरजा ए. गुप्ता कुलपति गुजरात विश्वविद्यालय, प्रो. मनोज दीक्षित कुलपति एमजीएसयू, सौरभ पांडे, निदेशक इंडिया थिंक काउंसिल और अन्य विभिष्ट विभूतियों ने आनलाइन प्लेटफार्म के माध्यम से जुड़कर महाकुम्भ-2025 पर चिंतन मंथन किया।

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