उत्तराखंड

तकनीकी शिक्षा में नई उड़ान: गुरुकुल कांगड़ी को मिला एम.टेक (ईसीई) की मंज़ूरी

हरिद्वार। शिक्षा, संस्कृति और तकनीकी नवाचार के संगम गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय ने एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन (AICTE) ने विश्वविद्यालय को एम.टेक (इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग) पाठ्यक्रम शुरू करने की स्वीकृति प्रदान की है। आगामी शैक्षणिक सत्र से इस कोर्स में 18 सीटों पर प्रवेश प्रारंभ होंगे।

यह कार्यक्रम पहले से संचालित एम.टेक (कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग) के साथ तकनीकी शिक्षा के विस्तार में मील का पत्थर साबित होगा। विश्वविद्यालय की 123 वर्षों की गौरवशाली विरासत में यह नवाचार नई ऊर्जा का संचार करेगा।

इस मौके पर कुलपति प्रोफेसर हेमलता ने AICTE अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव एवं समस्त सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह मान्यता विश्वविद्यालय के तकनीकी गुणवत्ता, अनुसंधान और नवाचार की दिशा में किए जा रहे प्रयासों का प्रतिफल है। एम.टेक (ईसीई) न केवल छात्रों के लिए एक सशक्त करियर मार्ग प्रशस्त करेगा, बल्कि भारत के विकसित भारत 2047 विज़न में भी अहम भूमिका निभाएगा।

 

विशेष उल्लेखनीय है कि कन्या गुरुकुल हरिद्वार में इस सत्र से बी.टेक (कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग) की शुरुआत भी की जा रही है, जो छात्राओं को तकनीकी क्षेत्र में आगे बढ़ने का अवसर प्रदान करेगा।

कुलसचिव प्रो. सुनील कुमार ने कहा कि इंजीनियरिंग संकाय सदैव उन्नत तकनीकों के समावेश के लिए प्रयासरत है और यह उपलब्धि उसी का प्रमाण है। उन्होंने संकायाध्यक्ष प्रो. विपुल शर्मा और उनकी टीम को इस सफलता के लिए शुभकामनाएं दीं।

प्रो. विपुल शर्मा ने कहा,कि यह छात्रों के लिए एक स्वर्णिम अवसर है। यह पाठ्यक्रम उन्हें उभरते तकनीकी क्षेत्रों में विशेषज्ञता प्राप्त करने का मंच देगा।

 

वित्त अधिकारी प्रो. राकेश जैन ने इसे पोस्ट ग्रेजुएट छात्रों के लिए अत्यंत उपयोगी बताया और कहा कि यह कदम विश्वविद्यालय की अकादमिक गुणवत्ता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगा।

इस उपलब्धि पर प्रो. प्रभात कुमार, प्रो. नवनीत, प्रो. ब्रह्मदेव, प्रो. करमजीत भाटिया, प्रो. विवेक गुप्ता, प्रो. देवेंद्र गुप्ता, प्रो. वी. के. सिंह, डॉ. सुनील पवार, डॉ. एम.एम. तिवारी, डॉ. नितिन कंबोज, डॉ. अजय मलिक, डॉ. संजीव लांबा सहित कई शिक्षकों ने हर्ष व्यक्त करते हुए बधाइयाँ दीं।

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