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होर्मुज में भारतीय नाविकों पर बर्बरता बर्दाश्त नहीं : विदेश मंत्री

भारत ने ईरान को दी सख्त चेतावनी

दिल्ली। होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिका और ईरान के बीच चल रही जंग अब बेकाबू हो गई है। यह रास्ता तेल के व्यापार के लिए दुनिया की सबसे अहम धमनियों में से एक है, लेकिन अब यह भारतीय नाविकों के लिए ‘डेथ जोन’ बन चुका है।

दुनिया भर की मर्चेंट नेवी में करीब 10% से 17% भारतीय नाविक कार्यरत हैं, और इस घातक जंग में सबसे ज्यादा पिस वही रहे हैं। भारत ने अब साफ कर दिया है कि अपने नागरिकों पर होने वाला कोई भी हमला उसे कतई बर्दाश्त नहीं है। चाहे ईरान हो या अमेरिका, नई दिल्ली ने कूटनीतिक स्तर पर अपनी ‘नो-नॉनसेंस’ नीति का लोहा मनवाया है।

हाल ही में जब ईरान की क्रूज मिसाइलों ने यूएई के तेल टैंकरों ‘मोम्बासा’ और ‘अल बहिया’ को निशाना बनाया, जिसमें एक भारतीय नाविक की मौत हो गई और कई घायल हो गए, तो भारत सरकार ने तुरंत कड़ा रुख अपनाया। विदेश मंत्रालय ने ईरान के डिप्टी चीफ ऑफ मिशन मोहम्मद जवाद होसैनी को आनन-फानन में तलब किया। यह मुलाकात कोई सामान्य शिष्टाचार नहीं थी, बल्कि इसे टीवी कैमरों की मौजूदगी में सार्वजनिक किया गया ताकि तेहरान को भारत के गुस्से का सीधा संदेश मिल सके। विदेश मंत्रालय के जॉइंट सेक्रेटरी आनंद प्रकाश ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारतीय नाविकों पर इस तरह की बर्बरता बर्दाश्त के बाहर है।

भारत की यह कड़क कूटनीति केवल ईरान तक सीमित नहीं है। जून 2026 में जब अमेरिकी नौसेना ने ओमान की खाड़ी में कमर्शियल जहाजों पर हमले किए थे और तीन भारतीय नाविकों की जान गई थी, तब भी भारत ने बिना डरे अमेरिकी दूतावास के सीनियर राजनयिक जेसन मीक्स को दो बार मंत्रालय तलब किया था। उस समय भी भारत ने दो-टूक कहा था कि सिविलियन शिपिंग और निर्दोष नाविकों को निशाना बनाना किसी भी हाल में स्वीकार्य नहीं है।

बता दें कि 13 जुलाई को ओमान की समुद्री सीमा के पास से गुजर रहे ‘मोम्बासा’ और ‘अल बहिया’ टैंकरों पर ईरान की दो विनाशकारी मिसाइलें आकर गिरीं। धमाका इतना भीषण था कि जहाज मलबे में तब्दील हो गए। ‘मोम्बासा’ पर सवार एक भारतीय नाविक की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि छह भारतीय बुरी तरह झुलस गए। इससे दो दिन पहले भी ईरान ने ‘जीएफएस गैलेक्सी’ जहाज पर हमला किया था, जिसमें एक भारतीय नाविक अभी भी लापता है। अब तक पश्चिम एशिया में जारी इस खूनी खेल में 14 बेगुनाह भारतीय नाविक अपनी जान गंवा चुके हैं। भारत का सब्र अब पूरी तरह टूट चुका है और सरकार ने अपनी सुरक्षा नीति को और अधिक आक्रामक बना दिया है।

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