भारतीय हेलीकॉप्टर ने नेपाल की सीमा में नहीं की घुसपैठ : शशिर खनाल
खराब मौसम के कारण हुई थी एंट्री

काठमांडू। नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने कहा है कि खराब मौसम की वजह से भारत का एक हेलीकॉप्टर नेपाल के हवाई क्षेत्र में घुस गया था। उन्होंने कहा कि ऐसा कोई संकेत नहीं है कि भारतीय हेलीकॉप्टर किसी सोची-समझी साजिश या बुरी नीयत से दार्चुला में घुसा था। यह पूरी तरह से भौगोलिक स्थिति और मौसम की वजह से हुआ। इस मामले पर नेपाल के संबंधित अधिकारी भारतीय पक्ष के संपर्क और तालमेल में हैं।
खनाल का यह बयान 10 जून की सुबह हुई उस घटना के बारे में है, जब भारतीय सेना का एक हेलिकॉप्टर बिना सरकारी मंजूरी के नेपाल के हवाई क्षेत्र में घुस गया था। हेलीकॉप्टर में भारत की इंडो-तिब्बत बॉर्डर पुलिस (ITBP) के डायरेक्टर जनरल शत्रुजीत सिंह कपूर सवार थे। हेलीकॉप्टर को कालापानी जाते समय दार्चुला की व्यास रूरल म्युनिसिपैलिटी-1 के छांगरू इलाके के ऊपर उड़ते हुए देखा गया था। इसके बाद से नेपाल ने इस घटना को लेकर भारत से आपत्ति भी जताई थी।
खनाल ने कहा कि नेपाल ऐतिहासिक समझौते और मानचित्र के आधार पर भारत के साथ सीमा विवाद को कूटनीतिक वार्ता के जरिये सुलझाने के लिए हमेशा तैयार है। नेपाली संसद के उच्च सदन राष्ट्रीय सभा में सांसदों के सवालों का जवाब देते हुए खनाल ने यह भी कहा कि विदेश मंत्रालय ने मई में संसद में अपने भाषण के दौरान प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह की टिप्पणियों के संबंध में अपनी विस्तृत राय पहले ही सार्वजनिक कर दी है।
खनाल ने कहा कि नेपाल सरकार, नेपाल और भारत के बीच गहरे संबंधों की भावना और संवेदनाओं का सम्मान करते हुए, ऐतिहासिक समझौते और मानचित्र के आधार पर कूटनीतिक वार्ता के जरिये (भारत के साथ) सीमा विवाद सुलझाने के लिए हमेशा तैयार है। प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह के 31 मई के इस बयान से विवाद खड़ा हो गया था कि नेपाल ने भी अलग-अलग जगहों पर भारतीय इलाकों पर कब्जा किया है और इस मुद्दे को सुलझाने के लिए हिमालयी देश ने चीन और ब्रिटेन को शामिल किया है।
बुधवार को सुस्ता सीमा विवाद पर खनाल ने कहा, “नेपाल और भारत के अलग-अलग सीमावर्ती इलाकों में पहले ही तंत्र बनाए जा चुके हैं और वे सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय सीमा के आसपास जो भी काम हो रहा है, वह दोनों पक्षों के बीच तालमेल से किया जा रहा है।” खनाल ने कहा, “जहां तक (दक्षिणी नेपाल के) सुस्ता इलाके में 132 मीटर लंबे तटबंध के निर्माण की बात है, तो दोनों देशों के अधिकारियों के बीच तालमेल बिठाने के बाद ही काम आगे बढ़ा है। दोनों देशों की संबंधित संस्थाएं एक-दूसरे के लगातार संपर्क में हैं और जरूरी काम कर रही हैं।” नेपाल और भारत के बीच लिपुलेख, लिम्पियाधुरा और कालापानी को लेकर सीमा का पुराना विवाद है और दोनों देश इन इलाकों पर अपना दावा करते हैं।




